गौरव पालीवाल की इंसानियत की कहानी: होटल में सफाई का काम करते हुए 2,500 से अधिक लोगों तक पहुंचाई स्वास्थ्य सेवा
जागृति फाउंडेशन के Director & Founder गौरव पालीवाल आज भी करते हैं सफाई का काम, अपनी सीमित आय और सहयोग से जरूरतमंदों की मदद का प्रयास
समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े पद, संपत्ति या प्रसिद्धि की आवश्यकता नहीं होती। कई बार समाज के सबसे साधारण समझे जाने वाले लोग अपने छोटे-छोटे प्रयासों से ऐसी मिसाल कायम कर देते हैं, जो बड़े-बड़े लोगों को भी सोचने पर मजबूर करती है। गौरव पालीवाल (Gaurav Paliwal), जागृति फाउंडेशन के Director & Founder, की कहानी इसी भावना को सामने रखती है।
गौरव पालीवाल का जीवन इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करता है कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पेशे से नहीं, बल्कि उसके विचारों और समाज के प्रति उसके योगदान से भी बनती है। खास बात यह है कि जागृति फाउंडेशन का नेतृत्व करने के साथ-साथ गौरव पालीवाल आज भी होटल में सफाई का काम करते हैं।
₹8,000–₹10,000 की आय से शुरू हुआ सेवा का सफर
गौरव पालीवाल एक होटल में सफाईकर्मी के रूप में काम करते रहे हैं। उनकी जिम्मेदारियों में लैट्रिन और बाथरूम की सफाई, झाड़ू-पोछा और होटल के रोजमर्रा के सफाई संबंधी कार्य शामिल हैं। उनकी मासिक आय लगभग ₹8,000 से ₹10,000 बताई जाती है।
इतनी सीमित आय में अपना जीवन चलाना आसान नहीं है। इसके बावजूद गौरव ने अपनी कमाई में से बचत करके जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का निर्णय लिया। उनके आसपास के लोगों और काम के दौरान उन्हें यह देखने को मिला कि गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाना कई बार बेहद मुश्किल होता है।
महंगी दवाइयां, ब्लड टेस्ट, आंखों की जांच और मोतियाबिंद जैसे इलाज आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। इन समस्याओं को देखकर गौरव पालीवाल ने केवल चिंता करने के बजाय अपने स्तर पर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया।
जागृति फाउंडेशन के माध्यम से सेवा की पहल
गौरव पालीवाल ने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर जागृति फाउंडेशन के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद का प्रयास शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद फाउंडेशन के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
बताई गई जानकारी के अनुसार, इन गतिविधियों में मुफ्त नेत्र जांच शिविर, जरूरतमंदों को निःशुल्क दवाइयां, मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिकित्सकीय सहयोग, ब्लड टेस्ट कैंप और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं शामिल रही हैं।
इन प्रयासों में डॉक्टरों और सहयोगियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही, जिनके सहयोग से जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का काम आगे बढ़ा।
बिना दिखावे के सेवा करने की कोशिश
गौरव पालीवाल की कहानी का एक उल्लेखनीय पहलू यह है कि सीमित व्यक्तिगत आय के बावजूद उन्होंने समाज सेवा को अपनी जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सेवा यात्रा में किसी व्यापारी, राजनीतिक व्यक्ति या बाहरी संस्था से चंदे पर निर्भर रहने के बजाय व्यक्तिगत संसाधनों और सहयोग के माध्यम से कार्य किया गया।
अब तक लगभग 2,500 से अधिक लोगों तक मुफ्त मेडिकल सुविधाएं पहुंचने का दावा किया गया है। हर सहायता के पीछे किसी व्यक्ति या परिवार की वास्तविक जरूरत जुड़ी हुई है।
सेवा कार्यों के दस्तावेज भी सुरक्षित
जागृति फाउंडेशन से जुड़े सेवा कार्यों की पारदर्शिता के लिए नेत्र शिविरों और अन्य सेवाओं के वीडियो, फोटो, समाचार-पत्रों की कटिंग तथा संबंधित अधिकारियों के प्रमाणित पत्र सुरक्षित होने की जानकारी दी गई है। ये दस्तावेज सेवा गतिविधियों के रिकॉर्ड के रूप में रखे गए हैं और जरूरत पड़ने पर कार्यों की पुष्टि में सहायक हो सकते हैं।
पेशा नहीं, इंसानियत बनाती है पहचान
गौरव पालीवाल की कहानी एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश देती है। एक व्यक्ति होटल में सफाई का काम कर सकता है और उसी समय समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए सेवा का माध्यम भी बन सकता है।
जागृति फाउंडेशन के Director & Founder Gaurav Paliwal की यह यात्रा बताती है कि समाज सेवा के लिए बड़ी संपत्ति या ऊंचा पद जरूरी नहीं। सच्ची इच्छा, संवेदनशीलता और अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देने का संकल्प भी बदलाव की शुरुआत बन सकता है।
गौरव पालीवाल का सफाई का काम करना उनके सेवा कार्यों से अलग कोई छोटी पहचान नहीं, बल्कि यह उनकी उस जमीनी यात्रा का हिस्सा है जिसने उन्हें जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को करीब से समझने का अवसर दिया।
क्योंकि समाज में बदलाव हमेशा बड़े मंचों से नहीं आता—कभी-कभी वह उन्हीं हाथों से शुरू होता है, जो रोज दूसरों की गंदगी साफ करते हैं और फिर उन्हीं हाथों से किसी जरूरतमंद के लिए मदद का रास्ता बनाते हैं।
